आज मैं ये जाना
आज मैं ये जाना
कितने दिनोंसे मैं
दौडता ही आया
कभी इसकी पीछे
कभी उसकी पीछे
कुछ करके आशा की
किसीसे मिलजाएगा कुछ II
कभी आता भी एसी सोच
की किसीसे कोई शाबासी मिले
यहीहै बात जिन्दगीकी जहां
मरता रोज
पहले कभी सरपे नहीं था एसी
सोच
एसेही एक जिंदगी चलरहा था
सोज II
मगर अब आगे और नहीं
अभी मैं बनगया हूं हुसियार
मैं खुदको करचुका हूं मुक्त
सारे व चीजें करके परिहार
जो मुझे कर रहीथी खोखला
अन्दर
येसारे मुझे ही मुझसे कर
रहेथे दूर
आज मैं जाना करता मुझको
प्यार
जिबनको समझा हूं करता मनन
बारबार II

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